Reported and Published by: Up Times Live Team
Updated: 18 March, 2026 (Wednesday, 06:51pm)IST
ब्यूरो, लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पूर्णकालिक पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति की कवायद अब अपने अंतिम चरण में पहुँच गई है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित कड़े मानकों और संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की अनिवार्य प्रक्रिया का पालन करते हुए, प्रदेश के गृह विभाग ने मंगलवार को वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नामों का पैनल आयोग को प्रेषित कर दिया है। शासन की इस औपचारिक कार्रवाई के बाद अब प्रदेश को जल्द ही नया स्थाई डीजीपी मिलने की उम्मीद है।
वरिष्ठता और सेवाकाल का मानक:
सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा भेजे गए इस पैनल में वर्ष 1990 से लेकर 1996 बैच के तीन दर्जन से अधिक जांबाज अधिकारियों के नाम शामिल किए गए हैं। चयन की प्राथमिक शर्त के रूप में केवल उन्हीं अधिकारियों को इस सूची में स्थान मिला है, जिन्होंने पुलिस सेवा में 30 वर्ष का कार्यकाल सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिया है। अब गेंद दिल्ली स्थित संघ लोक सेवा आयोग के पाले में है, जहाँ वरिष्ठता, बेदाग छवि और कार्यकुशलता के आधार पर तीन सर्वश्रेष्ठ अधिकारियों के नामों को ‘शॉर्टलिस्ट’ किया जाएगा।
इन नामों पर टिकी हैं निगाहें:
आईपीएस संवर्ग की वर्तमान वरिष्ठता सूची पर नजर डालें तो 1990 बैच की अधिकारी और वर्तमान डीजी रेणुका मिश्रा का नाम सबसे ऊपर है। उनके बाद 1991 बैच के आलोक शर्मा (डीजी, एसपीजी) और पीयूष आनंद (डीजी, एनडीआरएफ) का कद काफी ऊंचा माना जा रहा है। हालांकि, प्रशासनिक गलियारों में इस बात की प्रबल चर्चा है कि वर्तमान डीजीपी राजीव कृष्ण के कार्य अनुभव और सरकार के विश्वास को देखते हुए, पैनल वापस आने के बाद अंतिम मुहर उन्हीं के नाम पर लग सकती है।
चयन की संवैधानिक प्रक्रिया:
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, राज्य सरकार सीधे डीजीपी की नियुक्ति नहीं कर सकती। प्रक्रिया के तहत:
- पैनल प्रेषण: राज्य सरकार वरिष्ठ अधिकारियों के नाम यूपीएससी को भेजती है।
- आयोग का चयन: यूपीएससी प्राप्त नामों में से तीन सबसे उपयुक्त अधिकारियों का चयन कर राज्य को वापस भेजता है।
- अंतिम निर्णय: इन तीन नामों में से किसी एक को चुनना राज्य सरकार का विशेषाधिकार होता है।
माना जा रहा है कि इस सप्ताह के अंत तक आयोग की ओर से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी और प्रदेश को अपना नया स्थाई मुखिया मिल जाएगा।













