फेरी लगाकर गांव-गांव से जुटाते थे पुराने मोबाइल, मदरबोर्ड के जरिए देशभर में फैला था ठगी का जाल
Reported by: Adrash Tripathi
Edited by: Amit Yadav
Updated: 16 April, 2026 (Thrusday, 08:15am)IST
महराजगंज: जनपद में साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। श्यामदेउरवा थाना और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने एक ऐसे शातिर अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो ग्रामीण इलाकों से पुराने मोबाइल इकट्ठा कर उन्हें साइबर ठगों तक पहुँचाता था। पुलिस ने बिहार निवासी गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से करीब 80 लाख रुपये मूल्य के 318 मोबाइल फोन बरामद किए हैं।
लालच देकर जाल में फंसाते थे आरोपी:
पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से काम करता था। आरोपी गांवों में फेरी लगाकर छोटे-मोटे सामान और वस्तुओं का लालच देकर लोगों से उनके पुराने या खराब मोबाइल फोन ले लेते थे। इन मोबाइलों और उनके मदरबोर्ड को इकट्ठा कर पश्चिम बंगाल स्थित अपने सहयोगियों को भेजा जाता था। जांच में पता चला है कि इन उपकरणों का इस्तेमाल ओटीपी (OTP) फ्रॉड, फिशिंग और फर्जी कॉलिंग जैसे गंभीर साइबर अपराधों को अंजाम देने के लिए किया जा रहा था।
फर्जी दस्तावेजों से बचते थे पुलिस की नजर से
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विकेश कुमार (25), समकांत साहनी (40), बृजकिशोर (37), मुन्ना कुमार (23) और रामदास (35) के रूप में हुई है, जो बिहार के रहने वाले हैं। इनके पास से 318 मोबाइल के अलावा 110 मदरबोर्ड, मोटरसाइकिलें और कई फर्जी दस्तावेज भी मिले हैं। आरोपी इन फर्जी कागजातों का इस्तेमाल मोबाइल पर अपना मालिकाना हक जताने और पुलिस की पूछताछ से बचने के लिए करते थे।
पुलिस टीम की सराहना:
एसपी ने बताया कि आरोपियों के आपराधिक इतिहास की पड़ताल की जा रही है। इस सफल कार्रवाई में श्यामदेउरवा पुलिस और जनपद की साइबर टीम की अहम भूमिका रही। पुलिस अब गिरोह के उन सदस्यों की तलाश कर रही है जो पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में बैठकर इस पूरे सिंडिकेट को ऑपरेट कर रहे थे।
जनता के लिए अपील: पुराने मोबाइल न दें अनजान हाथों में
पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे सस्ते सामान या लालच के चक्कर में अपने पुराने मोबाइल फोन किसी अनजान फेरीवाले को न दें। आपके पुराने मोबाइल का मदरबोर्ड साइबर अपराधियों के लिए एक बड़ा हथियार बन सकता है, जिससे वित्तीय धोखाधड़ी और व्यक्तिगत डेटा की चोरी का खतरा बना रहता है।












