डीजीपी राजीव कृष्ण ने जारी किए सख्त निर्देश; सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों को 50% तक कम करने का लक्ष्य
लखनऊ: प्रदेश में बेकाबू रफ्तार और सड़क हादसों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस मुख्यालय ने कड़ा रुख अपनाया है। अब राज्य में होने वाली ऐसी किसी भी सड़क दुर्घटना को, जिसमें तीन या उससे अधिक व्यक्तियों की मृत्यु होती है, उसे ‘स्पेशल रिपोर्ट (SR) केस’ की श्रेणी में रखा जाएगा। डीजीपी राजीव कृष्ण ने इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करते हुए पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही तय कर दी है।
वरिष्ठ अधिकारियों को खुद संभालनी होगी कमान:
डीजीपी ने साफ किया है कि सड़क हादसों की जांच में अब विवेचकों (IO) को अकेले नहीं छोड़ा जाएगा। अक्सर जांच में लापरवाही के कारण दोषियों को सजा नहीं मिल पाती और मृतकों के परिजनों को बीमा राशि के लिए दर-दर भटकना पड़ता है। अब वरिष्ठ अधिकारियों को विवेचना में सक्रिय सहयोग करना होगा, ताकि कानूनी खामियों को दूर कर दोषियों को सजा दिलाई जा सके।
“शासन का लक्ष्य सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की संख्या में 50 फीसदी की कमी लाना है। इसके लिए जांच की गुणवत्ता और अधिकारियों का पर्यवेक्षण अनिवार्य है।”
— राजीव कृष्ण, डीजीपी
केस डायरी में इन 5 बिंदुओं का उल्लेख अनिवार्य:
डीजीपी के आदेशानुसार, विवेचना के दौरान अब केस डायरी में केवल दुर्घटना का जिक्र काफी नहीं होगा। विवेचकों को निम्नलिखित तकनीकी और कानूनी पहलुओं को दर्ज करना होगा:
- सटीक पहचान: वाहन स्वामी और चालक का सही नाम और स्थायी पता।
- अवैध मॉडिफिकेशन: क्या वाहन में नियमों के विरुद्ध कोई बदलाव किया गया है?
- दस्तावेजों की वैधता: बीमा (Insurance), फिटनेस, और प्रदूषण प्रमाण पत्र की स्थिति।
- रजिस्ट्रेशन: वाहन के पंजीकरण का नवीनीकरण और उसकी वर्तमान वैधता।
- लापरवाही का साक्ष्य: दुर्घटना के समय वाहन की तकनीकी स्थिति।
आश्रितों को बीमा दिलाने में मिलेगी मदद:
इस कवायद का एक मुख्य उद्देश्य पीड़ितों के परिवारों को राहत पहुंचाना है। जांच में सामने आया है कि पुलिस की लचर पैरवी और अधूरी केस डायरी की वजह से बीमा कंपनियां क्लेम खारिज कर देती हैं। नई व्यवस्था के तहत, पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर मृतकों के आश्रितों को समय पर और बिना बाधा के बीमा लाभ मिल सकेगा।












