April 18, 2026 2:34 am

सिन्दुरिया थानाध्यक्ष के बिगड़े बोल- “मैं तो SP का फोन नहीं उठाता, आप क्या चीज हैं”

Reported by: Girajesh Kumar Gupta 

Edited by: Up Times Live Team 

Updated: 03 February, 2026 (Tuesday, 06:51pm)IST

महराजगंज/सिन्दुरिया:  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार जहां ‘जीरो टॉलरेंस’ और जन-सुनवाई में संवेदनशीलता का दावा कर रही है, वहीं जनपद के सिन्दुरिया थाने के मुखिया के तेवर सरकार की मंशा को पलीता लगा रहे हैं। फोन न उठाने की खबर छपने से नाराज थानाध्यक्ष राजकुमार सिंह ने पत्रकार के सामने न केवल अपनी नाराजगी जाहिर की, बल्कि अनुशासन की मर्यादा लांघते हुए अपने ही विभाग के कप्तान (SP) को लेकर विवादित बयान दे डाला।

खबर से भड़के साहब, अनुशासन ताक पर:

बीते सोमवार को जब एक स्थानीय पत्रकार ने सिन्दुरिया थानाध्यक्ष से उनके कार्यस्थल पर मुलाकात की, तो साहब का पारा सातवें आसमान पर था। हाल ही में अखबारों में थानाध्यक्ष द्वारा फोन न उठाने और जन-सुनवाई में लापरवाही की खबरें प्रकाशित हुई थीं। अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करने के बजाय थानाध्यक्ष ने पत्रकार से वार्ता के दौरान अहंकार भरे लहजे में कहा— “आपने मेरा फोन न उठाना अखबार में छाप दिया? मैं तो अपने एसपी (SP) साहब तक का फोन समय पर नहीं उठाता और 10 मिनट बाद कॉल बैक करता हूँ।”

पुलिस महकमे की ‘चेन ऑफ कमांड’ पर सवाल:

थानाध्यक्ष का यह बयान अब पूरे जनपद में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह बयान कई गंभीर सवाल खड़े करता है:

  • क्या एक थानाध्यक्ष खुद को जिले के पुलिस अधीक्षक से ऊपर समझता है?
  • यदि किसी आपात स्थिति या दंगे के दौरान जिले का कप्तान संपर्क करना चाहे और थानाध्यक्ष ’10 मिनट बाद’ कॉल बैक करने की नीति अपनाए, तो सुरक्षा का क्या होगा?
  • जब एक जिम्मेदार पद पर बैठा अधिकारी अपने वरिष्ठ के प्रति इतना लापरवाह है, तो आम फरियादियों की क्या बिसात?

प्रेस और जनता में गहरा रोष:

लोकतंत्र के चौथे स्तंभ (प्रेस) का काम शासन-प्रशासन की कमियों को आईना दिखाना है। लेकिन सिन्दुरिया थानाध्यक्ष की यह ‘अनुशासनहीन’ स्वीकारोक्ति दर्शाती है कि उन्हें न तो मीडिया की परवाह है और न ही विभाग की नियमावली की। स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब साहब अपने बॉस को नहीं गिनते, तो आम जनता की सुनवाई थाने में किस स्तर पर होती होगी, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।

क्या होगी कार्रवाई?

पुलिस एक अनुशासित बल है, जहाँ वरिष्ठों के आदेश और संचार का पालन सर्वोपरि है। थानाध्यक्ष के इस बयान ने विभाग की छवि धूमिल की है। अब देखना यह है कि महराजगंज पुलिस कप्तान अपने मातहत के इस सार्वजनिक अहंकार और अनुशासनहीनता पर क्या कड़ा रुख अपनाते हैं।

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