महराजगंज में पकड़ा गया जार्डन ब्राउन पुलिस रिमांड पर; देश की सुरक्षा एजेंसियां (IB, RAW, SSB) खंगाल रही हैं मददगारों की कुंडली
Reported by: Adrash Tripathi
Edited by: Amit Yadav
Updated: 19 July, 2026 (Sunday, 05:56pm)IST
महराजगंज: भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा एजेंसियों के हत्थे चढ़ा अमेरिका का पूर्व नेवी सील्स कमांडो जार्डन ब्राउन सुरक्षा एजेंसियों के लिए पहेली बना हुआ है। शनिवार को पुलिस रिमांड पर लिए जाने के बाद हुई कड़ी पूछताछ में शातिर जार्डन बार-बार अपने बयान बदलता रहा। उसने सुरक्षा एजेंसियों को गुमराह करने के लिए तीन अलग-अलग नाम बताए और अपनी असली पहचान छिपाने की कोशिश की। फिलहाल, आईबी (IB), रॉ (RAW), एसएसबी (SSB) और स्थानीय पुलिस संयुक्त रूप से उसके भारत आने के असली मकसद और उसकी ट्रैवल हिस्ट्री को खंगालने में जुटी है।
दिल्ली एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन को दिया था चकमा
जांच में यह साफ हो चुका है कि जार्डन ब्राउन थाईलैंड से फ्लाइट के जरिए दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचा था। वहां वह इमिग्रेशन विभाग की आंखों में धूल झोंककर चकमा देकर भागने में कामयाब रहा। इसके बाद वह यूपी के महराजगंज जिले में भारत-नेपाल सीमा पर स्थित भगवानपुर बॉर्डर पर पहुंचा, जहां ११ जुलाई को एसएसबी (SSB) के जवानों ने उसे संदिग्ध हालत में दबोच लिया।
तीन मददगारों के नाम आए सामने, पुलिस की छापेमारी शुरू
पूछताछ के दौरान जार्डन ने भारत में मौजूद अपने तीन मददगारों— राज, चेतन और नाज के नामों का खुलासा किया है। इस इनपुट के बाद पुलिस और खुफिया एजेंसियां बेहद सक्रिय हो गई हैं। इन तीनों मददगारों की तलाश में पुलिस की टीमें संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं ताकि इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।
जेल में ही हुआ मेडिकल, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
जार्डन ब्राउन पूर्व में जिला जेल से भागने का प्रयास कर चुका है, जिसे देखते हुए शनिवार को पुलिस पूरी तरह सतर्क नजर आई। सुबह १० बजे भगवानपुर चौकी इंचार्ज व विवेचक अजय कुमार भारी पुलिस बल के साथ जिला जेल पहुंचे। मामले की संवेदनशीलता और जार्डन के कमांडो बैकग्राउंड को देखते हुए उसे जिला अस्पताल न ले जाकर, जेल परिसर के भीतर ही डॉक्टरों की टीम बुलाकर उसका मेडिकल परीक्षण कराया गया।
क्या कहते हैं जिम्मेदार:
“न्यायालय से आदेश मिलने के बाद शनिवार सुबह १० बजे अमेरिकी नागरिक जार्डन ब्राउन को सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर पुलिस अभिरक्षा (रिमांड) में सौंप दिया गया है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां मामले की गहराई से जांच कर रही हैं।”
— वी.के. गौतम, जेल अधीक्षक, महराजगंज










