शीर्षक: निचलौल में समाचार संकलन के दौरान विवाद; कैमरा बंद होते ही खाकी ने दिखाई धौंस
Reported by: Virendra Singh Yadav
Edited by: Amit Yadav
Updated: 19 July, 2026 (Sunday, 05:45pm)IST
महराजगंज/निचलौल: जनपद के निचलौल कस्बे में समाचार संकलन और वायरल वीडियो की पुष्टि करने गए एक स्थानीय पत्रकार को पुलिसिया रौब और धमकी का सामना करना पड़ा। आरोप है कि क्षेत्र में तैनात कांस्टेबल अशोक यादव एक खबर के प्रकाशित होने से इस कदर नाराज हो गए कि उन्होंने कैमरा बंद होते ही पत्रकार को गंभीर अंजाम भुगतने की धमकी दे डाली। इस घटना के बाद से स्थानीय पत्रकारों और प्रबुद्ध वर्ग में भारी आक्रोश है तथा मामले की निष्पक्ष जांच व दोषी पुलिसकर्मी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठने लगी है।
कैमरा बंद होते ही बदला कांस्टेबल का रुख
पीड़ित पत्रकार के अनुसार, वे तथ्यों के आधार पर एक मामले की कवरेज और वायरल वीडियो की सत्यता जानने के लिए मौके पर पहुंचे थे। वहां कई अन्य पुलिसकर्मी भी मौजूद थे, जिन्होंने पूरी प्रक्रिया में सहयोग किया और कोई आपत्ति नहीं जताई। लेकिन, कांस्टेबल अशोक यादव खबर लिखे जाने की बात से भड़क गए। पत्रकार का आरोप है कि जब तक कैमरा ऑन था, कांस्टेबल नियंत्रित रहे, लेकिन जैसे ही कैमरा बंद हुआ, उन्होंने अभद्र व्यवहार करते हुए धमकी देना शुरू कर दिया।
“अगर मौके पर मौजूद स्थानीय लोग बीच-बचाव नहीं करते, तो कोई बड़ी अप्रिय घटना घट सकती थी। कैमरा बंद होने के बाद भी काफी देर तक धमकी देने का सिलसिला जारी रहा।”
— पीड़ित पत्रकार का बयान
पुराने मामलों को लेकर भी चर्चा में रहे हैं कांस्टेबल
इस विवाद के बाद कांस्टेबल अशोक यादव के पुराने कार्यकाल को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। क्षेत्र में चर्चा है कि कुछ समय पूर्व एक अन्य संवेदनशील मामले में भी इसी कांस्टेबल द्वारा पीड़ित पक्ष को ₹5,000 “दान” देने की बात सामने आई थी, जिसे लेकर पुलिस विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े हुए थे। हालांकि, इन पुराने आरोपों की आधिकारिक तौर पर स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
साजिश की आशंका, सुरक्षा की गुहार
पत्रकार ने अंदेशा जताया है कि सच उजागर करने के कारण उनके खिलाफ कोई बड़ी साजिश रची जा रही है, जिससे उनकी जान-माल और सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है। उन्होंने पुलिस के उच्चाधिकारियों से मामले का संज्ञान लेने का अनुरोध किया है।
उठ रहे हैं कई गंभीर सवाल:
दावे बनाम हकीकत: उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा समय-समय पर पत्रकारों की सुरक्षा और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए माहौल देने के कड़े निर्देश दिए जाते हैं। ऐसे में जमीनी स्तर पर खाकी का यह रवैया सरकार के दावों पर सवालिया निशान लगाता है।
अधिकारियों की चुप्पी: खबर लिखे जाने तक इस मामले में स्थानीय पुलिस प्रशासन के किसी वरिष्ठ अधिकारी का आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
अब देखना यह होगा कि महराजगंज पुलिस प्रशासन इस गंभीर प्रकरण को कितनी संजीदगी से लेता है और आरोपों की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई को सामने लाता है या नहीं।










