अभिलेखों में दर्ज थे 118 छात्र, मौके पर मिले इक्का-दुक्का; बायोमेट्रिक हाजिरी और प्रोफाइल से हुआ था खिलवाड़
Reported by: Adrash Tripathi
Edited by: Amit Yadav
Updated: 25 July, 2026 (Saturday, 04:11pm)IST
महराजगंज: प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) के तहत राजकीय आईटीआई महराजगंज (धनेवा-धनेई) में हुए 8.85 लाख रुपये के गबन और फर्जीवाड़े के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने मामले में संलिप्त तत्कालीन प्रधानाचार्य मसूद इशरत को शुक्रवार सुबह संतकबीरनगर जिले के खलीलाबाद स्थित राजकीय आईटीआई चकदही से गिरफ्तार कर लिया। मसूद इशरत वर्तमान में वहीं प्रधानाचार्य के पद पर तैनात थे।
कागजों में छात्र, मौके से गायब
फर्जीवाड़े का यह पूरा मामला अगस्त 2025 में उस वक्त सामने आया था, जब कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (भारत सरकार) की केंद्रीय टीम ने राजकीय आईटीआई महराजगंज का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अभिलेखों (रजिस्टर) में तो 118 छात्रों का नामांकन दर्ज मिला, लेकिन मौके पर केवल कुछ ही छात्र उपस्थित थे।
गहन जांच के बाद फर्जीवाड़े की परतें खुलती चली गईं। जांच में सामने आया कि संस्था में आधार आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली (AEBAS) में बड़े पैमाने पर फर्जी हाजिरी लगाई जा रही थी। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड में जालसाजी, अवैध रूप से छात्रों की फर्जी प्रोफाइल तैयार करने और मूल्यांकन परिणामों में हेराफेरी कर सरकारी धन का गबन किया जा रहा था।
अनुदेशक के बाद अब प्रधानाचार्य पर गिरी गाज
मामले की गंभीरता को देखते हुए 10 अगस्त 2025 को राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) के तत्कालीन राज्य सहभागिता अधिकारी विनय द्विवेदी की तहरीर पर सदर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। शुरुआत में तत्कालीन अनुदेशक अशोक यादव के खिलाफ धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था।
पुलिस की विवेचना जैसे-जैसे आगे बढ़ी, फर्जीवाड़े की कड़ियां तत्कालीन प्रधानाचार्य तक जा पहुँचीं। पुलिस को मूल रूप से गोरखपुर के गोरखनाथ थाना क्षेत्र (वजीराबाद कॉलोनी) निवासी मसूद इशरत के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिले। इसके बाद सदर कोतवाली पुलिस की टीम ने कार्रवाई करते हुए उन्हें खलीलाबाद से धर दबोचा।
“विवेचना के दौरान फर्जीवाड़े और गबन के मामले में तत्कालीन प्रधानाचार्य मसूद इशरत की संलिप्तता के ठोस साक्ष्य मिले थे, जिसके आधार पर उन्हें गिरफ्तार किया गया है। मामले की विवेचना अभी प्रचलित है, जो भी अन्य लोग इसमें शामिल होंगे, उन पर भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
— निर्भय कुमार सिंह, सदर कोतवाल, महराजगंज










