बौद्ध स्तूप खुदाई के दौरान मजदूरों के हाथ लगा तांबे के सिक्कों से भरा घड़ा, जानिए इस जगह की पूरी हकीकत

Reported by: Adrash Tripathi 

Edited by: Amit Yadav 

Updated: 07 October, 2025 (Tuesday, 10:02pm)IST

महराजगंज/लक्ष्मीपुर: महराजगंज में मजदूर रविवार को बौद्ध स्‍तूप देवदह की बाउंड्री बनाने के लिए नींव खोद रहे थे। इसी दौरान उनके फावड़े एक घड़े से टकराए। जब सावधानी से घड़े को बाहर निकाला गया तो देखा कि उसमें तांबे के बेश्‍कीमती सिक्‍के भरे हुए हैं। सिक्‍कों समेत घड़े का वजन करीब 36 किलो निकला। अधिकारियों को जैसे ही खबर मिली उन्‍होंने इस पुरातात्विक खोज को अपने कब्‍जे में ले लिया और लखनऊ भेज दिया।

लक्ष्‍मीपुर क्षेत्र के ग्राम पंचायत बनरसिहा कला में स्थित इस बौद्ध स्‍तूप की नींव खोदाई के दौरान इन सिक्‍कों को खोजा गया। अनुमान है कि ये सिक्‍के कुषाण काल के हैं। कुषाण राजवंश भारत में 30 से 375 ईस्‍वी तक था। इस हिसाब से यह आज से लगभग 2000 साल पुराना पुरातात्विक साक्ष्‍य है।

क्या बोले क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी कृष्ण मोहन द्विवेदी:

क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी कृष्ण मोहन द्विवेदी इन सिक्कों को अपने कब्जे में लेकर राज्य पुरातत्व विभाग कार्यालय लखनऊ ले गए। इस क्षेत्र की 88.8 एकड़ जमीन पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है। यहां विभाग पिछले साल से उत्खनन करा रहा है। इस ताजा खोज पर कृष्ण मोहन द्विवेदी ने बताया कि घड़े में बरामद सिक्के कुषाणकालीन हैं। सभी सिक्के तांबे के हैं। यह पहला मौका नहीं है, इसके पहले भी यहां से सिक्के बरामद हो चुके हैं। यह स्थल कुषाणकालीन नगर था। ऐसे में यहां सिक्कों का मिलना स्वभाविक है।

आर्कियोलॉजिकल एक्सपर्ट इस जगह को महात्‍मा बुद्ध की ननिहाल देवदह से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, इस तरह का अभी कोई प्रमाण नहीं मिला है। अभी तक हुए उत्खनन के दौरान मिट्टी के वर्तन, रिंगबेल, खिलौने, दीवार आदि मिली थी। उत्खनन स्थल को संरक्षित करने के लिए पहले चारों तरफ तारों की बाड़ लगाई गई थी। फिलहाल, विभाग यहां बाउंड्री बनवा रहा है।

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