रेवेन्यू बार एसोसिएशन की बैठक में फूटा गुस्सा; प्रस्ताव पारित कर कहा— फाइलों को लटकाने का खेल बंद करे प्रशासन
महराजगंज: स्थानीय रेवेन्यू बार एसोसिएशन की एक आपात बैठक में तहसील प्रशासन के खिलाफ अधिवक्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। संगठन के अध्यक्ष राजेश श्रीवास्तव के नेतृत्व में जुटे वकीलों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर स्थानीय अधिकारियों पर मनमाने रवैये और पत्रावलियों (फाइलों) को जानबूझकर अटकाने का गंभीर आरोप लगाया। अधिवक्ताओं ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि अधिकारियों ने अपनी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं किया, तो वकील कामबंद कर सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।
फाइलों में हीलाहवाली बर्दाश्त नहीं: राजेश श्रीवास्तव
बैठक की अध्यक्षता करते हुए रेवेन्यू बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश श्रीवास्तव ने कहा कि तहसील के अधिकारी लगातार अधिवक्ताओं द्वारा पेश की जा रही पत्रावलियों में हीलाहवाली कर रहे हैं।
“अफसरों की इस टालमटोल नीति के कारण अधिवक्ताओं को अपने रोजमर्रा के काम के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यदि वक्त रहते अधिकारी नहीं सुधरे, तो अधिवक्ता संघ लामबंद होकर बड़ा आंदोलन खड़ा करेगा।”
— राजेश श्रीवास्तव, अध्यक्ष (रेवेन्यू बार एसोसिएशन)
सरकारी काम का बहाना बनाकर पीड़ितों को दौड़ा रहे अफसर: उपाध्यक्ष
संगठन के उपाध्यक्ष नागेंद्र प्रसाद शुक्ल ने अधिकारियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि तहसील के अधिकारी अक्सर ‘सरकारी कामकाज की व्यस्तता’ का खोखला बहाना बनाकर जरूरी फाइलों को दबाकर बैठ जाते हैं। अधिकारियों के इस अड़ियल और मनमाने रवैये के कारण दूर-दराज के गांवों से आने वाले गरीब और मजलूम पीड़ितों को न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं।
इन प्रमुख अधिवक्ताओं ने जताया विरोध
बैठक के दौरान तहसील परिसर में वकीलों की भारी मौजूदगी रही। प्रस्ताव का समर्थन करने और अपनी आवाज बुलंद करने वालों में मुख्य रूप से शामिल थे:
- वरिष्ठ अधिवक्ता: अरुण सिंह, दयानंद यादव, राजन सिंह, कुलदीप, संजय कुमार, जयप्रकाश।
- सहयोगी सदस्य: रामअजोर यादव, सरदार सतपाल, रमेश चौधरी, चंद्रप्रकाश वर्मा, अनिल कुमार।
- अधिवक्ता संघ: मनोज कुमार मिश्रा, राम रतन यादव, अनिल कुमार शर्मा, राजेश चौधरी, विभूति यादव, गिरीश त्रिपाठी, अजय यादव, शेख समसुद्दीन और जगनारायण विश्वकर्मा आदि।
‘आर-पार’ की लड़ाई के मूड में वकील
तहसील सूत्रों की मानें तो पिछले कुछ समय से अधिवक्ताओं और तहसील प्रशासन के बीच भीतर ही भीतर तनाव सुलग रहा था, जो अब इस बैठक के बाद खुलकर सामने आ गया है। अधिवक्ताओं के इस सख्त रुख से साफ है कि यदि प्रशासन ने तुरंत संवाद कर इस गतिरोध को नहीं सुलझाया, तो आने वाले दिनों में तहसील का कामकाज पूरी तरह ठप हो सकता है।











