July 28, 2026 2:47 pm

निचलौल ब्लॉक में ‘महाकाल ट्रेडर्स’ का खेल: बिना पंजीकरण वाली फर्म पर मेहरबान हुक्मरान, सरकारी बजट में सेंध

  • आयकर और GST नियमों की उड़ी धज्जियां, कागजी फर्म के खाते में भेजी गई लाखों की रकम
  • ● ग्राम पंचायत अधिकारियों और सिंडिकेट की मिलीभगत से ‘कमीशन’ का बड़ा खेल उजागर

Reported by: Ravindra Yadav 

Edited by: Virendra Singh Yadav 

Updated: 10 March, 2026 (Tuesday, 07:51am)IST

महराजगंज/निचलौल: जनपद का निचलौल विकास खंड भ्रष्टाचार का नया ‘हब’ बनता जा रहा है। ताज़ा मामला सरकारी धन के बंदरबांट का है, जहाँ नियमों को ताक पर रखकर एक ऐसी फर्म को लाखों का भुगतान कर दिया गया, जिसका वजूद सिर्फ कागजों तक सीमित है। ‘महाकाल ट्रेडर्स’ नाम की इस कथित फर्म को किया गया भुगतान अब ब्लॉक प्रशासन के गले की फांस बनता नजर आ रहा है।

GST और PAN का अता-पता नहीं, फिर भी मेहरबान साहब!

शासन का स्पष्ट आदेश है कि किसी भी कार्ययोजना का भुगतान केवल वैध GST और PAN पंजीकृत फर्मों को ही किया जाएगा। लेकिन निचलौल ब्लॉक में इन नियमों को रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया है। सूत्रों के अनुसार, ‘महाकाल ट्रेडर्स’ का आयकर विभाग में कोई पंजीकरण ही नहीं है। इसके बावजूद, कई ग्राम पंचायत अधिकारियों (VDO) ने अपनी चहेती इस अपंजीकृत फर्म के खाते में बेधड़क भुगतान सुनिश्चित कराया। यह सीधे तौर पर सरकारी खजाने को चूना लगाने और वित्तीय गबन का मामला है।

कमीशन के सिंडिकेट में ‘मौन’ हुए जिम्मेदार:

जैसे ही यह फर्जीवाड़ा प्रकाश में आया, ब्लॉक मुख्यालय से लेकर विकास भवन तक हड़कंप मच गया है। जब इस विषय पर संबंधित अधिकारियों से पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो उन्होंने रहस्यमयी चुप्पी साध ली। क्षेत्र में चर्चा है कि यह पूरा खेल ‘मोटा कमीशन’ डकारने के लिए रचा गया है, जिसमें ग्राम प्रधान से लेकर ब्लॉक स्तर के कई रसूखदार अधिकारी शामिल हैं। बिना सत्यापन के भुगतान करना इस बात की पुष्टि करता है कि सिस्टम में ऊपर से नीचे तक ‘साठगांठ’ गहरी है।

जांच हुई तो नपेंगे कई ‘सफेदपोश’:

स्थानीय जागरूक नागरिकों का कहना है कि यह तो सिर्फ एक बानगी है। यदि जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी (CDO) निचलौल ब्लॉक के पिछले एक साल के भुगतानों की ऑडिट कराएं, तो ‘महाकाल ट्रेडर्स’ जैसी दर्जनों फर्जी फर्में और करोड़ों के घोटाले सामने आ सकते हैं।

“किसी भी अपंजीकृत फर्म को भुगतान करना गंभीर वित्तीय अनियमितता है। यदि ऐसा हुआ है, तो संबंधित सचिव और उत्तरदायी अधिकारियों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई और रिकवरी की जाएगी।”

✓✓ – गौरवेन्द्र सिंह (श्रम उपायुक्त महराजगंज)

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