Reported by: Adrash Tripathi
Edited by: Amit Yadav
Updated: 13 February, 2026 (Friday, 06:51pm)IST
महराजगंज/नौतनवां: भारत-नेपाल सीमा पर स्थित नौतनवां क्षेत्र में पुलिस ने आधार और आयुष्मान कार्ड बनाने के नाम पर चल रहे एक बड़े अंतरराष्ट्रीय स्तर के डिजिटल फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ किया है। एसपी सोमेन्द्र मीणा के निर्देश पर हुई इस कार्रवाई में पुलिस ने बैरवा बनकटवा टोला स्थित एक ग्राहक सेवा केंद्र (सीएससी) से दो युवकों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोपी रिमोट एक्सेस ऐप और चोरी की आईडी के जरिए लोगों के भविष्य और राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ कर रहे थे।
डिजिटल शातिर: यूट्यूब बना ‘क्राइम मास्टर’
गिरफ्तार आरोपियों—सूर्यनरायण और धीरज चौरसिया—ने पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि महज 10 दिन पहले उन्होंने यूट्यूब पर आधार बनाने का तरीका खोजा था। वहां मिले एक नंबर के जरिए वे मन्टू कुमार नामक व्यक्ति के संपर्क में आए। मन्टू ने खुद को आधार प्राधिकरण का अधिकारी बताकर इन्हें एनिडेस्क (AnyDesk) और फिंगर क्लोन जैसे खतरनाक टूल्स उपलब्ध कराए।
रिमोट कंट्रोल पर था जालसाजी का खेल:
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह पूरी तरह हाईटेक था:
फर्जी लॉगिन: आरोपी दूसरे की वैध आईडी और पासवर्ड का अवैध इस्तेमाल कर रहे थे।
वसूली: हर कार्ड के बदले गरीब ग्रामीणों से 500 से 1000 रुपये ऐंठे जाते थे।
कमीशन का खेल: वसूली गई रकम का 50% हिस्सा मुख्य सरगना मन्टू को यूपीआई के जरिए भेजा जाता था।
मौके से बरामद उपकरण:
छापेमारी के दौरान पुलिस टीम ने भारी मात्रा में तकनीकी उपकरण बरामद किए हैं:
- एक एसर लैपटॉप, आइरिस स्कैनर और बायोमेट्रिक मशीन।
- वेबकैम, 3 मोबाइल फोन और 7 एनरोलमेंट स्लिप।
- नकदी और कई अन्य आपत्तिजनक दस्तावेज।
“आधार जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों से छेड़छाड़ राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। सीमावर्ती क्षेत्रों में ऐसे केंद्रों की निगरानी बढ़ा दी गई है। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमें दबिश दे रही हैं।”
— सोमेन्द्र मीणा, पुलिस अधीक्षक
कानूनी शिकंजा:
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 336(3), 338, 61(2) और आधार अधिनियम 2016 की धारा 35 के तहत मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस अब उन 20 लोगों की भी जांच कर रही है जिनके आधार कार्ड फर्जी तरीके से बनाए गए थे।











