Published by: Up Times Live Team
Updated: 07 November, 2025 (Friday, 01:15pm)IST
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मकान मालिक (Landlord) और किराएदारों (Tenant) के बीच दशकों से चले आ रहे विवादों को कम करने की दिशा में योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक ऐतिहासिक और निर्णायक फैसला लिया है। सरकार ने रेंट एग्रीमेंट (किराया अनुबंध) के रजिस्ट्रेशन पर लगने वाले भारी-भरकम स्टांप शुल्क (Stamp Duty) को खत्म करते हुए एक निश्चित (Fixed) और बेहद मामूली फीस लागू कर दी है।
राज्य सरकार के इस कदम से अब किराएदारी से जुड़े कानूनी दस्तावेज बनवाना आसान और सस्ता हो गया है, जिससे मकान मालिक और किराएदार दोनों को कानूनी सुरक्षा मिलेगी और कोर्ट-कचहरी के मामलों में कमी आएगी।
मुख्य फैसला: 4% तक की ड्यूटी खत्म, मामूली फीस लागू:
अब तक, उत्तर प्रदेश में रेंट एग्रीमेंट का रजिस्ट्रेशन कराने पर औसत वार्षिक किराए के आधार पर 4% तक का भारी-भरकम स्टांप शुल्क लगता था। इसी उच्च लागत के कारण अधिकांश मकान मालिक और किराएदार रजिस्टर्ड एग्रीमेंट बनवाने से बचते थे, जिसके चलते आए दिन विवाद होते थे।
योगी सरकार ने इस व्यवस्था को बदलते हुए अब फिक्स्ड रजिस्ट्रेशन फीस लागू कर दी है:
₹2 लाख तक के सालाना किराए पर: एग्रीमेंट अवधि के अनुसार, फीस ₹500 से ₹1500 के बीच होगी।
इससे अधिक के किराए पर: अधिकतम फीस ₹2500 तक तय की गई है।
इस फैसले से, अब एक साल तक के अनुबंध पर ₹500 और पांच साल तक के अनुबंध पर ₹1500 की नाममात्र फीस देनी होगी, जिससे लाखों लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस नई और सरल व्यवस्था का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि प्रदेश के सभी शहरी क्षेत्रों में किराएदारी के मामलों में कानूनी अनुपालन सुनिश्चित हो सके।












