Reported by: Adrash Tripathi
Edited by: Amit Yadav
Updated: 30 June, 2026 (Tuesday, 07:11pm)IST
महराजगंज: महासंग्राम और आस्था की ऐतिहासिक धरोहर, महराजगंज का सुप्रसिद्ध शक्तिपीठ लेहड़ा देवी धाम अब नए और भव्य स्वरूप में नजर आएगा। प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन के साझा प्रयासों से इस पौराणिक स्थल का कायाकल्प होने जा रहा है। लगभग 45 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से पूरे मंदिर परिसर को एक आधुनिक धार्मिक और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। प्रस्तावित ‘लेहड़ा देवी कॉरिडोर’ में श्रद्धालुओं को न केवल विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि महाभारत कालीन इस धरोहर की ऐतिहासिक पहचान को भी अक्षुण्ण रखा जाएगा।
🏛️ अर्धचंद्राकार आकार में सजेगा दरबार, लाल बलुआ पत्थरों से चमकेंगे घाट
प्रस्तावित योजना के अनुसार, लेहड़ा देवी मंदिर परिसर को अर्धचंद्राकार (Semi-Circular) कॉरिडोर के रूप में डिजाइन किया गया है।
नक्काशीदार पत्थरों से सुसज्जित परिसर: पूरे परिसर में राजस्थान के विशेष नक्काशीदार पत्थरों का उपयोग होगा। मंदिर की चारदीवारी पर देवी-देवताओं की जीवंत प्रतिमाएं और आध्यात्मिक नक्काशी उकेरी जाएगी।
नैनो बबल तकनीक से साफ होगा सरोवर: मंदिर के पास स्थित जलाशय को साफ रखने के लिए अत्याधुनिक ‘नैनो बबल तकनीक’ का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके घाटों को लाल बलुआ पत्थरों (Red Sandstone) से नया रूप दिया जाएगा।
लाइट एंड साउंड शो का आकर्षण: शाम होते ही पूरा परिसर फसाड लाइटिंग और आकर्षक लाइट एंड साउंड शो के माध्यम से जगमगा उठेगा, जो पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण होगा।
🛍️ श्रद्धालुओं को मिलेंगी विश्वस्तरीय सुविधाएं, व्यवस्थित होगा बाजार
दूर-दराज से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कॉरिडोर में कई बदलाव किए जा रहे हैं:
- एक भव्य प्रवेश द्वार के साथ प्रसाद कक्ष, श्रद्धालु विश्राम गृह, फर्स्ट एड सेंटर और जूता-चप्पल गृह का निर्माण होगा।
- सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए हाई-टेक सीसीटीवी कंट्रोल रूम स्थापित किया जाएगा।
- पारंपरिक ‘कड़ाही प्रथा’ (धार्मिक अनुष्ठान) के लिए एक अलग और समर्पित सुरक्षित क्षेत्र विकसित किया जाएगा।
- मंदिर के आसपास की दुकानों को हटाकर एक आधुनिक और सुव्यवस्थित धार्मिक बाजार (Religious Market) का रूप दिया जाएगा। इसके साथ ही बड़ी गाड़ियों के लिए आधुनिक पार्किंग भी बनेगी।
📜 गौरवशाली इतिहास: अज्ञातवास में अर्जुन ने की थी यहां तपस्या
लेहड़ा देवी धाम का इतिहास अत्यंत प्राचीन और पौराणिक है। जिला मुख्यालय से करीब 7 किलोमीटर दूर स्थित यह मंदिर प्राचीन समय में ‘आर्द्रवन’ नामक घने जंगल के बीच पवह नदी (वर्तमान नाला) के तट पर स्थित था। इसका प्राचीन नाम ‘अदरौना देवी स्थान’ था।
पौराणिक मान्यता: महाभारत काल में जब पांडव अज्ञातवास काट रहे थे, तब उन्होंने इस जंगल में समय बिताया था। यहीं पर अर्जुन ने मां वनदेवी (भगवती दुर्गा) की कठोर तपस्या कर दिव्य शक्तियां प्राप्त की थीं, जिसके बाद इस शक्तिपीठ की स्थापना हुई। इसके अलावा, यहाँ स्थित प्राचीन तपस्थली पर सिद्ध योगी बाबा वंशीधर समेत कई संतों की समाधियां भी श्रद्धा का केंद्र हैं।
“लेहड़ा देवी धाम का विकास जनपद की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक एवं पर्यटन परियोजनाओं में से एक है। ₹45 करोड़ की लागत से बनने वाले इस कॉरिडोर में मंदिर की सांस्कृतिक और पारंपरिक पहचान को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा। हमारा लक्ष्य इसे पूर्वांचल का प्रमुख धार्मिक स्थल बनाना है, जिससे श्रद्धालुओं को बेहतरीन सुविधाएं मिलने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और पर्यटन को भी भारी बढ़ावा मिलेगा।”
— गौरव सिंह सोगरवाल, जिलाधिकारी (महराजगंज)











